जयपुर, राजस्थान : रविवार को जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में अचानक आग लग गई, जिससे छह मरीजों की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के समय डॉक्टर, नर्स और स्टाफ मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी, लेकिन सही वजह अभी जांच में है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तुरंत घटना स्थल का दौरा किया और मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सुरक्षा मानकों की पूरी जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी हादसे पर शोक जताया और राहत-बचाव कार्य की जानकारी ली। प्रधानमंत्री कार्यालय ने मृतकों के परिवारों को तुरंत सहायता राशि देने की घोषणा की।
स्थानीय लोग बताते हैं कि अस्पताल में कई सुरक्षा उपकरण पुराने और खराब हालत में थे। आग लगते ही स्टाफ ने तुरंत आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन धुएँ और आग की तीव्रता के कारण कई मरीजों को सुरक्षित स्थान तक ले जाना मुश्किल हो गया। घायलों को पास के अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में आग सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच और प्रशिक्षित स्टाफ की मौजूदगी जरूरी है। इस हादसे ने देशभर में अस्पतालों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान सरकार ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षा ऑडिट कराने के आदेश दे दिए हैं।
सोशल मीडिया पर लोग अस्पताल की लापरवाही और सुरक्षा में कमी को लेकर गुस्सा और चिंता व्यक्त कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं दुर्लभ नहीं हैं, लेकिन सुरक्षा उपायों की कमी से नुकसान बढ़ जाता है।
यह घटना साफ कर देती है कि मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक और इमरजेंसी प्लान कितने जरूरी हैं। अस्पताल की अग्निशमन प्रणाली और इमरजेंसी निकासी मार्गों की जांच चल रही है।
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अस्पताल प्रबंधन को भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित सुरक्षा ऑडिट, अग्नि निरीक्षण और कर्मचारियों का इमरजेंसी प्रशिक्षण अनिवार्य है। इससे भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।
राजस्थान सरकार ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने और घायलों के बेहतर इलाज का आश्वासन दिया है। राज्य के सभी अस्पतालों में आपातकालीन बचाव टीमों और अग्निशमन उपकरणों की जांच भी शुरू कर दी गई है।
यह हादसा अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और पुराने उपकरणों की स्थिति को उजागर करता है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि सभी अस्पतालों में सुरक्षा उपाय सख्ती से लागू करें और मरीजों की जान को सर्वोपरि रखें।




