दिल्ली में सियासी संग्राम: ‘वोट चोरी’ मार्च में राहुल गांधी का कूड़ेदान विरोध, अखिलेश संग विपक्ष की एकजुटता, पुलिस ने बीच में रोका

दिल्ली सोमवार को राजनीतिक घटनाक्रम का गवाह बनी, जब संसद से चुनाव आयोग तक विपक्ष का वोट चोरी मार्च 2025 निकला। इस विशाल प्रदर्शन का मकसद था बिहार में चल रहे SIR विवाद और 2024 लोकसभा चुनाव में हुई कथित धांधली पर आवाज़ उठाना। विपक्ष का दावा है कि Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के ज़रिए मतदाता सूची में गड़बड़ी कराई जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।
सुबह से ही गरम हुआ माहौल
सुबह करीब 11 बजे, संसद परिसर में हलचल शुरू हो गई। 25 विपक्षी दलों के 300 से अधिक सांसद एक साथ निकले और नारे लगाए — “SIR हटाओ, लोकतंत्र बचाओ”।
इस विपक्षी दल प्रदर्शन दिल्ली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और आप समेत कई दल शामिल हुए। नेताओं का आरोप है कि बिहार में चल रहे SIR विवाद बिहार के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं और फर्जी वोट जोड़े जा रहे हैं।
राहुल गांधी का कूड़ेदान विरोध
मार्च की सबसे चर्चित तस्वीर में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी कूड़ेदान विरोध करते नजर आए। उन्होंने संसद परिसर में SIR की एक फाइल उठाकर कूड़ेदान में फेंक दी।
मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 2024 चुनाव धांधली आरोप सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि कर्नाटक की एक विधानसभा सीट पर 1 लाख से ज्यादा वोट चोरी का सबूत है। उन्होंने कहा, “यह फाइल सिर्फ एक कागज़ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हत्या का प्रमाण है।”
अखिलेश यादव का साथ
इस मार्च में अखिलेश यादव दिल्ली मार्च में शामिल होकर राहुल गांधी के साथ कदम से कदम मिलाते दिखे। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश के मतदाताओं के अधिकार की है।
पुलिस का सख्त रुख
जैसे-जैसे मार्च संसद से आगे बढ़ा, दिल्ली पुलिस बैरिकेड मार्च का नज़ारा सामने आया। Transport Bhawan के पास भारी बैरिकेडिंग और सीढ़ियाँ लगाकर रास्ता रोक दिया गया।
पुलिस ने सांसदों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी, जिससे माहौल में तनातनी बढ़ गई। हालांकि किसी बड़े टकराव की खबर नहीं आई, लेकिन नारेबाज़ी और राजनीतिक बयानबाज़ी जारी रही।
SIR विवाद क्या है?
Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची की समीक्षा और संशोधन की एक प्रक्रिया है। सामान्यतः यह पारदर्शी होती है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि बिहार में इसे सत्ताधारी दल के फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट में जानबूझकर फेरबदल किया जा रहा है, जिससे चुनाव नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।
आगे की रणनीति
मार्च खत्म होने के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर अपनी शिकायत दर्ज कराने की योजना बनाई है। साथ ही, बिहार और अन्य राज्यों में जनसभाएं करने का ऐलान किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनावों में विपक्ष के लिए बड़ा हथियार बन सकता है। वहीं सरकार ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सोमवार का यह प्रदर्शन साफ़ कर गया कि वोट चोरी मार्च 2025 और SIR विवाद बिहार जैसे मुद्दे आने वाले महीनों में भारतीय राजनीति के केंद्र में रहेंगे। विपक्ष इसे “लोकतंत्र बचाओ” के नारे के साथ जनता तक ले जाना चाहता है, जबकि सरकार के लिए यह एक संवेदनशील चुनौती है।




