पटना, बिहार: भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान कर दिया है। राज्य की 243 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 24 अक्टूबर को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि यह चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो।
इस बार सभी राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार तैयार कर लिए हैं और प्रचार अभियान तेज कर दिया है। मुख्य विपक्षी और सत्ताधारी दल रैलियों, रोड शो और डिजिटल प्रचार के जरिए जनता तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं।

चुनाव आयोग ने विशेष सुरक्षा इंतजाम किए हैं। ईवीएम और वीवीपैट के जरिए मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। साथ ही चुनाव कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं की सुविधा के लिए मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ा दी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में राज्य की प्रमुख पार्टियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। पिछली बार की तुलना में इस बार युवा मतदाताओं की संख्या बढ़ी है, जिससे दलों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है।
मुख्य राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी घोषणापत्र जारी करना शुरू कर दिया है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क निर्माण और किसानों के लिए नई योजनाओं का जिक्र है। कई दलों ने ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण को प्रमुख मुद्दा बनाया है।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी प्रचार का अहम हिस्सा बन गए हैं। इस बार डिजिटल प्रचार और टीवी डिबेट का असर मतदाताओं के निर्णय पर पहले से अधिक दिख सकता है।
चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे मतदान के दौरान किसी प्रकार के दबाव या धमकी से प्रभावित न हों। सुरक्षा के लिए पुलिस और केंद्रीय बल तैनात किए जाएंगे। किसी भी तरह की धांधली या नियम उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।
साथ ही, गैर-सरकारी संगठन और स्थानीय संस्थाएं मतदाता जागरूकता अभियान चला रही हैं। इस चुनाव में महिला और युवा मतदाताओं की भागीदारी पर खास ध्यान दिया गया है। कई मतदान केंद्रों में विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि सभी मतदाता आसानी से मतदान कर सकें।
विश्लेषकों का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 केवल राज्य की राजनीति ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डाल सकता है। चुनाव परिणाम राज्य की विकास नीतियों और केंद्र-राज्य संबंधों को प्रभावित करेंगे।
अंततः, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 लोकतंत्र की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह जनता की आवाज़ को सामने लाता है और राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। चुनाव आयोग, प्रशासन और राजनीतिक दलों को मिलकर सुनिश्चित करना होगा कि यह चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो।





