पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतें और प्रदूषण की गंभीर समस्या ने दुनिया को वैकल्पिक ऊर्जा की ओर मोड़ा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा चेहरा हैं इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs)। भारत भी इस बदलाव की तेज़ लहर में शामिल हो चुका है।
Fact Check: भारत 2030 तक 30% EV अपनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का वर्तमान परिदृश्य

भारत अब EVs के लिए एक बड़ा बाज़ार बन चुका है।
EV बिक्री (पिछले वर्षों में वृद्धि)
- 2020-21: 1.3 लाख
- 2021-22: 4.3 लाख
- 2022-23: 12 लाख+
- 2023-24 (अनुमान): 18 लाख+
सबसे ज़्यादा योगदान दोपहिया और तिपहिया EVs का है।
सरकार की नीतियाँ और सब्सिडी
भारत सरकार EV को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है:
- FAME II योजना – 10,000 करोड़ रुपये का बजट।
- GST राहत – EVs पर सिर्फ़ 5% टैक्स।
- राज्य EV पॉलिसीज़ – दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु EV हब बनाने की दौड़ में।
उदाहरण: दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक नई रजिस्टर होने वाली गाड़ियों में 25% EV हों।
EV सेक्टर में प्रमुख कंपनियाँ और नए लॉन्च

प्रमुख भारतीय कंपनियाँ
- टाटा मोटर्स – Nexon EV, Tiago EV
- महिंद्रा – XUV400
- ओला इलेक्ट्रिक – S1 Pro, S1 Air
- Ather Energy – 450X
- TVS – iQube
- Bajaj – Chetak EV
विदेशी कंपनियाँ
- Tesla (जल्द प्रवेश)
- BYD Atto 3
- Hyundai Kona EV
EV इंफ्रास्ट्रक्चर और चार्जिंग स्टेशन
मौजूदा हालात
- 2021 – 1,800 स्टेशन
- 2022 – 6,586
- 2023 – 12,146
- 2025 लक्ष्य – 1 लाख+
चुनौतियाँ
- शहरों में तो नेटवर्क बन रहा है, लेकिन ग्रामीण इलाकों तक पहुँचना मुश्किल।
- बैटरी स्वैपिंग मॉडल शुरुआती चरण में है।
Quote: EV क्रांति तभी सफल होगी जब हर 25-30 किलोमीटर पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हो।
EV सेक्टर की प्रमुख चुनौतियाँ
- उच्च कीमतें – EVs अभी भी महंगी हैं।
- बैटरी सुरक्षा – आग लगने की घटनाओं ने सवाल उठाए।
- रेंज चिंता (Range Anxiety) – लंबी दूरी की यात्रा में चार्जिंग मुश्किल।
- टेक्निकल मैनपावर की कमी – सर्विस सेंटर और स्किल्ड इंजीनियरों की कमी।
पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ

पर्यावरणीय लाभ
- प्रति EV सालाना लगभग 1.5 टन CO₂ उत्सर्जन कम।
- ध्वनि प्रदूषण में कमी।
आर्थिक लाभ
- कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता घटेगी।
- बैटरी और खनिज आधारित उद्योगों को नई गति।
- EVs से दीर्घकालिक में ईंधन खर्च कम।
रोजगार और निवेश के अवसर
- बैटरी मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्रियाँ
- चार्जिंग नेटवर्क इंस्टॉलेशन
- EV सॉफ़्टवेयर और IoT स्टार्टअप्स
अनुमान: EV सेक्टर अगले 5 सालों में 10 लाख+ नई नौकरियाँ पैदा करेगा।
भारत बनाम दुनिया: EV सेक्टर की तुलना
| देश | EV मार्केट शेयर (2023) | विशेषता |
|---|---|---|
| चीन | ~30% | सबसे बड़ा EV निर्माता और उपभोक्ता |
| यूरोप | ~25% | सख्त उत्सर्जन नियम, बड़ा चार्जिंग नेटवर्क |
| अमेरिका | ~15% | Tesla और Rivian जैसी इनोवेटिव कंपनियाँ |
| भारत | ~6% | शुरुआती स्तर पर लेकिन तेज़ी से बढ़ता |
भविष्य की संभावनाएँ
- 2030 तक: 30-35% वाहन बिक्री EVs की हो सकती है।
- बैटरी लागत में गिरावट: अगले 5 वर्षों में 40-50% तक कमी संभव।
- EV बस और कमर्शियल वाहन: पब्लिक ट्रांसपोर्ट में EVs की बड़ी हिस्सेदारी।
भारत में EV क्रांति तेज़ी से बढ़ रही है। हालाँकि चुनौतियाँ मौजूद हैं, लेकिन सरकार, उद्योग और जनता के सहयोग से 2030 तक भारत ग्रीन मोबिलिटी का वैश्विक हब बन सकता है।





