छत्रपति संभाजीनगर: शहर की पुलिस ने सोमवार की देर रात एक बड़े अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जो अमेरिकी नागरिकों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बना रहा था। इस हाई टेक ठगी गैंग से पुलिस ने 116 युवक युवतियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।

करोड़ों के गैजेट्स जब्त
छापेमारी में पुलिस ने 119 लैपटॉप, कई मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई शहर पुलिस जोन 2 के उपायुक्त प्रशांत स्वामी के नेतृत्व में हुई। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के मुख्य आरोपी हैं भावेश चौधरी, भाविक पटेल, सतीश लाडे, वलय व्यास, अब्दुल फारुक उर्फ फारुकी और जॉन, जो अहमदाबाद (गुजरात) के रहने वाले हैं।

कैसे चलता था यह फर्जी नेटवर्क
चिकलथाना औद्योगिक परिसर में “के.एस. इंटरप्राइजेज” नाम से चल रहे इस कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को कॉल, ईमेल और एसएमएस भेजे जाते थे।
उन्हें टैक्स चोरी, डिजिटल अरेस्ट या लोन क्लोजर जैसे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती थी। इसके बाद कॉल सेंटर के एजेंट उनसे अंग्रेजी में बात करके उन्हें “डराकर” ठगी करते थे।
जब पीड़ित राजी हो जाता, तो उनसे अमेजन, एप्पल आईट्यून्स या वेस्टर्न यूनियन गिफ्ट कार्ड्स खरीदवाकर उनके कोड मांगे जाते। ये कोड गिरोह के सदस्य डॉलर में बदलकर फिर क्रिप्टो करेंसी और हवाला नेटवर्क के जरिए भारत लाते थे।
रातभर चलता था ठगी का खेल
यह चार मंजिला इमारत दिन में शांत और रात में एक्टिव रहती थी। क्योंकि अमेरिकी टाइम के हिसाब से भारत में रात का समय कॉल करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है।
इमारत की खिड़कियों पर काले पर्दे लगाए गए थे ताकि अंदर की गतिविधियां कोई न देख सके।
ठगी से कमाई और बंटवारा
ठगी से हुई कमाई का 45% हिस्सा आरोपी जॉन को और बाकी 55% हिस्सा अन्य पांच आरोपियों में बांटा जाता था।
कर्मचारियों को 25-30 हजार रुपये वेतन के साथ हर डॉलर पर 3 रुपये इंसेंटिव मिलता था।
आमतौर पर हर अमेरिकी नागरिक से 2,000 से 3,000 डॉलर की ठगी की जाती थी यानी हर डील पर कर्मचारी को 6,000 से 9,000 रुपये तक मिल जाते थे।
देशभर से लाए गए थे युवक युवतियां
कॉल सेंटर में काम करने वाले युवक-युवतियां देश के अलग-अलग हिस्सों से थे गुजरात, पश्चिम बंगाल, असम, मिजोरम, मणिपुर, कर्नाटक, तेलंगाना, यूपी, एमपी और मुंबई तक से लोग यहां लाए गए थे।
प्रत्येक टीम को अलग अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं जैसे डेटा कलेक्शन, कॉलिंग, डील क्लोजिंग और पेमेंट कन्वर्ज़न।
20 घंटे चला पुलिस का जंबो ऑपरेशन
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक गीता बागवड़े और उपनिरीक्षक राधा लाटे के नेतृत्व में सोमवार रात 1:15 बजे छापा शुरू हुआ, जो मंगलवार रात 9 बजे तक चला।
इसमें जोन-1 और जोन-2 के अधिकारी, साइबर पुलिस, अपराध शाखा और 100 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल रहे।
खुद पुलिस आयुक्त सुधीर हिरेमठ ने भी मौके का दौरा किया।
DGP ऑफिस तक पहुंचा मामला
यह मामला अंतरराष्ट्रीय ठगी से जुड़ा होने के कारण पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला और अपर पुलिस महानिदेशक निखिल गुप्ता की भी सीधी निगरानी में है।
गुप्ता पहले छत्रपति संभाजीनगर में पुलिस आयुक्त रह चुके हैं, इसलिए वे पूरे ऑपरेशन की बारीकी से मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
मेडिकल जांच में आई मुश्किलें
116 आरोपियों की मेडिकल जांच में भी पुलिस को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई आरोपी मराठी या हिंदी नहीं बोल पाते थे, जिससे बातचीत में कठिनाई हुई।
आरोपियों को देर शाम जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां रात 8 बजे तक जांच पूरी हुई।
पुलिस का कहना है कि यह देश का अब तक का सबसे बड़ा फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क हो सकता है, जिसका जाल भारत से लेकर अमेरिका तक फैला हुआ था।
अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य साथी किन-किन शहरों और देशों में सक्रिय हैं।



