दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में रविवार की सुबह भूस्खलन ने तबाही मचा दी। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई गांव और पहाड़ी इलाके मलबे में दब गए, जिससे अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल घटनास्थल पर जुटकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
मौसम विभाग ने पिछले सप्ताह से ही दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश की चेतावनी जारी की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक हुई बारिश ने पहाड़ियों की मिट्टी को कमजोर कर दिया था, जिससे भूस्खलन जैसी आपदा हुई। इस भूस्खलन के कारण कई सड़कें और संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं, जिससे राहत और बचाव कार्य में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तुरंत राहत कार्यों की निगरानी के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद देने और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने मौके पर हेलीकॉप्टर और रेस्क्यू टीम भेज दी है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि भूस्खलन अचानक हुआ और कई घर मलबे की चपेट में आ गए। कई परिवार अभी भी लापता हैं। बचाव दल ने रेस्क्यू डॉग्स और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी है। इस कठिन समय में स्थानीय लोग भी प्रशासन की मदद कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाके भूस्खलन के प्रति संवेदनशील हैं। लगातार बारिश, ढीली मिट्टी और अवैध निर्माण इसे और खतरनाक बनाते हैं। उनका सुझाव है कि स्थानीय प्रशासन को सतत निगरानी और चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना चाहिए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित इलाकों में विद्युत और पानी की आपूर्ति भी बाधित हो गई है। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। साथ ही, विशेष राहत शिविर भी बनाए गए हैं, जहां प्रभावित लोग भोजन और रहने की सुविधा पा सकते हैं।
सोशल मीडिया पर लोग दार्जिलिंग की स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं। कई लोग दान और स्वयंसेवक भेजने की पेशकश कर रहे हैं। एनजीओ और सामाजिक संगठन भी प्रभावितों तक मदद पहुंचाने में सक्रिय हैं।
इस भूस्खलन का असर दार्जिलिंग की पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ा है। सैलानियों की संख्या काफी कम हो गई है और स्थानीय व्यवसायों को आर्थिक नुकसान हुआ है। पर्यटन विभाग ने सभी स्थलों पर आगाह किया है कि लोग केवल सुरक्षित क्षेत्रों में ही घूमें।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में वर्षा और भूस्खलन के प्रति सजग रहना बेहद जरूरी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय, सतत निगरानी और आपदा तैयारी को प्राथमिकता देनी होगी।
दार्जिलिंग का यह भूस्खलन न केवल मानवीय त्रासदी है, बल्कि प्रशासन और समाज के लिए चेतावनी भी है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहना और तुरंत राहत कार्य करना अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित लोगों तक मदद पहुँचाने का संकल्प लिया है और बचाव कार्य लगातार जारी हैं।




