यूक्रेन रूस युद्ध 2025 एक और नाटकीय मोड़ पर पहुँच गया है। 15 अगस्त को यूक्रेन ने एक रूसी बंदरगाह में खड़े उस पोत पर हमला किया, जो कथित तौर पर ईरानी हथियारों वाला जहाज़ था। यह हमला ठीक उसी दिन हुआ, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अलास्का शिखर सम्मेलन में पहली बार आमने सामने बैठे।
सैन्य कार्रवाई: समुद्र से रिफाइनरी तक
- रूसी पोत पर हमला: यूक्रेनी सेना का दावा है कि इस पोत में ईरान से भेजे गए हथियार थे।
- सिज़रान रिफाइनरी यूक्रेन हमला: इसी दिन यूक्रेनी विशेष बलों ने रूस की सिज़रान रिफाइनरी को निशाना बनाया, जिससे बड़े पैमाने पर विस्फोट हुए।
- यह रणनीति रूस की सप्लाई चेन को कमजोर करने के लिए मानी जा रही है।
कूटनीतिक मोर्चा: ट्रंप–पुतिन अलास्का बैठक
ट्रंप पुतिन अलास्का बैठक को लेकर दुनिया भर में उम्मीदें और शंकाएँ दोनों हैं।
- ट्रंप ने दावा किया कि “पुतिन मुझसे खिलवाड़ नहीं करेंगे”, लेकिन साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय समझौते की संभावना जताई।
- पुतिन ने इसे “रचनात्मक चर्चा” बताया और पश्चिमी प्रतिबंधों में ढील का संकेत दिया।
- यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने दोहराया कि किसी भी शांति समझौते में रूस को कब्ज़ाए गए इलाकों से हटना होगा।
जनता की प्रतिक्रिया
- सोशल मीडिया पर #UkraineWillNotFall और #NoTrustNoPeace ट्रेंड कर रहे हैं।
कई यूक्रेनी नागरिकों ने ट्रंप पर भरोसे की कमी जताई, इसे “एक खतरनाक राजनीतिक चाल” बताया।
अंतरराष्ट्रीय असर
- यूक्रेन शांति वार्ता के परिणाम केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेंगे; इनका असर यूरोप और नाटो की सुरक्षा नीति पर भी पड़ेगा।
- ईरान का हथियार आपूर्ति में कथित रूप से शामिल होना, मध्य पूर्व की राजनीति को भी इस युद्ध में खींच लाता है।
15 अगस्त 2025 को हुए ये सैन्य और कूटनीतिक घटनाक्रम, आने वाले महीनों में यूक्रेन रूस युद्ध 2025 की दिशा तय कर सकते हैं। सवाल यह है कि क्या यह शिखर सम्मेलन वास्तविक समाधान देगा, या इतिहास इसे केवल एक और खोखला राजनीतिक प्रदर्शन मान लेगा।



